मुहब्बत करूँ की इबादत करूँ

मैं कुदरत की शिकायत करूँ।
या क़िस्मत की ख़िदमत करूँ।
इतनी ख़ूबसूरत की हैरत करूँ।
मुहब्बत करूँ की इबादत करूँ।


Comments

Popular posts from this blog

आख़िरी इल्तज़ा

एक हाँ कहते कहते