आशा और निराशा

आशा और निराशा के बीच बंधी एक डोर है.
अब मालूम नहीं चलता जाना किस ओर है.
जो तुम आँखें बंद रखो तो रात घनघोर है.
जो तुम आँखें खोलो तो सब ओर अंजोर है.


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